शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

satya

यदि आप मानव हैं तो कभी न कभी आपके मन में यव विचार आता होगा की आखिर आप यहं क्यों और कैसे आये हैं . यहाँ से मतलब इस धरती से है . कैसे आये है इस बात का जबाव भी कोई ठीक ठीक नहीं दे पाया है और क्यों आये हैं इस बात का भी जबाव ठीक ठीक नहीं दिया जा सकता है लेकिन यदि आप फिर भी जानना चाहे तो मैं आपकी मदद कर सकता हूँ पर इसके लिया आपको भी विचा र करना होगा ,पहले आप खुद इस बारे में विचार करिए फिर भी यदि आप नहीं जन पाते हैं तो आप को मालूम हो जायेगा की आप किस अँधेरे में जीते रहे हैं. इन दोनों बातो के जबाव अलग अलग धर्मो में अलग अलग तरह से दिया गया है और कोई भी आपको संतुस्ट नहीं कर सकता है ,इसका मतलब है की आप एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ आपको सिर्फ एक मशीन की तरह जीना है , जो अपना पेट भरने और सुविधाओं को जुटाने में जीता रहता है और मर जाता है . हाँ इस जमीं पे ईश्वरीय शक्तिया हैं आप उन का विचार करिए और खुद जन जाइये की दुनिया में क्या हकीकत है , फिर भी नहीं जन पाते हैं तो मुझे कहिये मैं आपको बता दूंगा फिर आप खुद विचार करियेगा की क्या सही है और क्या गलत है.

मंगलवार, 7 जून 2011

jivan

जब भी आप जीवन के बारे में विचार करेंगे तो आपको हमेशा एक नया रूप दिखेगा ,बात इश्वर की करते हैं , इश्वर के पक्ष में प्रमाण मिलना लगभग असम्भव है , पर ये साबित करना बहुत ही आसान है की वह नहीं है ,आइये मैं आपको इश्वर का एक प्रमाण देता हूँ . अगर आप प्रसिद्द वैज्ञानिक आइंस्टीन के बारे में सुना है तो ये भी जानते होंगे की उर्जा और पदार्थ के बीच जो समंध होता उसके हिसाब से हमारी धरती और इस ब्रम्हांड के भी पहले जरुर कुछ था जिसके फलस्वरूप इस सब का निर्माण हुआ क्योंकि कोई भी पदार्थ निर्मित नहीं किया जा सकता है उसे सिर्फ परिवर्तित किया जा सकता है, तो जो इस सब के लिए उत्तरदायी उर्जा है उसे हम लगभग इश्वर के तुल्य मन सकते है बिलकुल ठीक ठीक परिभाषित करना तो कठिन है पर वह इश्वर हो सकता है.

शुक्रवार, 3 जून 2011

jivan

यदि आपके जीवन में कोई निश्चित लक्ष्य नहीं है तो आपके जीवन कामेक्षा द्वारा संचालित होने लगता है. अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करना जरुरी है क्योंकि बिना लक्ष्य के आप बिना दिशा के वायुयान की तरह हो जायेंगे .

गुरुवार, 2 जून 2011

jivan

कभी कभी आप को अकेलापन लगता है .कभी आप को लगता है कहाँ जाये ,कभी आप सोचते हैं क्या यही जिन्दगी है , अगर आप ये सब बनते सोचते हैं ,तो इसका मतलब है की आप आमिर आदमी नहीं हैं,क्योंकि अमीरों के पास इतना समय नहीं रहता है की वो ये सब सोचे ,पर यदि आप आमिर भी हैं और ये सब सोचते हैं तो आप को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए की जब सब कुछ होने के बाद आप ये सोंच रहे है तो इसका मतलब है की आप कुछ कमी महसूस कर रहे हैं सोचिये की वो क्या हो सकता है ,यदि आप ये सोचना सुरु करते हैं तो कभी न कभी आप अपने अन्दर की आत्मे के बारे में जरुर सोचने लंगेगे .

jivan

आप की विकास की यात्रा अब सिर्फ भौतिक विकास की यात्रा बन चुकी है , अब हम सिर्फ भौतिक विकास को ही प्रधानता दे रहे हैं , आप की योग्यता और स्तर आपके आर्थिक स्तर से संचालित होते हैं ,शायद यही कारन है की हम सिर्फ भौतिक विकास की तरफ भाग रहे हैं पर क्या इस विकास की कोई उपरी सीमा भी परिभाषित है ,आप तो इतना सोचते ही नहीं आप सिर्फ ऊपर की दिसा में भाग रहे हैं  कहाँ  जाना चाहते हैं ,सिर्फ एक ही उद्देश्य उच्तर आर्थिक स्थिती, पर आप कभी भी उस उपरी सीमा का निर्धारण नहीं कर सकते हैं ,क्या आप कर सकते हैं.

jivan

मानव इतिहास बताता है की हम पिछले बहुत समय से जी रहे है ,हमने बहुत विकास किया है पर क्या हमने विकास किया है ,यदि किया है तो  विकास के नाम पर आप क्या बताना चाहेंगे *तकनीक का विकास *शिक्षा का विकास*या पूंजी का विकास *या मानवता का विकास *इन सब में अगर कुछ महत्वपूर्ण है तो वो मानवता का विकास है ,यदि आप इतिहास देखेंगे तो शायद आप को लगे मानवता का विकास उलटी दिशा में हुआ है ,क्या आप बता सकते हैं .